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The engine of the body is a lever

Wrong lifestyle can spoil the engine of the body ( गलत जीवनशैली खराब कर सकती है शरीर का इंजन) 
लिवर हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है। लगभग डेढ़ किलो वजन और 15 सेंटीमीटर लंबी लीवर को शरीर का इंजन में कहते हैं। अस्वस्थ जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों के कारण कई बार यह संक्रमित हो जाता है। जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। अतः इसका ध्यान रखना जरूरी है।

शरीर की चयापचय प्रक्रिया को नियंत्रण करने में लिवर के महत्वपूर्ण भूमिका है। आज हम जो भी खाते पीते हैं। वह लिवर से होकर ही पाचन प्रक्रिया के लिए आंतों में पहुंचता है। जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। मगर हमारी गड़बड़ी से भरी जीवनशैली कई बार इसे बीमार कर देती है।
लिवर हमेशा दो कारण से संक्रमित होता है। वायरस के शरीर में प्रवेश करने से और अल्कोहल के सेवन करने से।
ऐसे में यह काम करना बंद कर देता है या डैमेज हो जाता है। इससे शरीर का मेटाबॉलिक बैलेंस गड़बड़ा जाता है और हम कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
रोग के लक्षण व खतरे :— संक्रमित लीवर से सबसे पहले पाचन क्रिया प्रभावित होती है। कमजोर लीवर से गैस बनना, पेट में दर्द, सूजन, अपच, कब्ज भूख ना लगना जैसी समस्याएं ही होती है। जिसे थकान, कमजोरी, पीलिया, यूरिन पीला पड़ना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
लीवर का संक्रमण बढ़ने पर हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर जैसे घातक बीमारी या घेर सकती है। समुचित उपचार ना होने पर लीवर ट्रांसप्लांट की नौबत आ जाती है। जिसके अभाव में जान जा सकती है।
क्यों उपयोगी है लिवर :— पाचन तंत्र को नियंत्रण रखता है। यह पीत्त दरव का निर्माण करता है। जो भोजन को पचाने और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक है। कार्बोहाइड्रेट, ग्लूकोज और फैट के संचयन के कारण यह एक बैटरी का काम करता है। इससे मिली ऊर्जा ही रोगों से लड़ने की ताकत देती है।विषाक्त पदार्थों को बाहर कर शरीर को डिटॉक्स करता है। प्रोटीन के निर्माण कर खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को बढ़ाता है। रक्त स्त्राव और इन्फेक्शन से बचाव करता है।
लीवर को इस तरह रखे हेल्दी
एक्टिव लाइफ स्टाइल :— स्वास्थ्य संबंधी बातों का पालन करें। रात को जल्दी सोए, सुबह जल्दी उठे, समय पर खाएं, फिजिकल एक्टिविटी रहने के लिए रोज एक्सरसाइज और योग करें।
सेल्फ मेडिकेशन ना करें : — कॉलेस्ट्रोल, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल कंट्रोल में रखें। हेपेटाइटिस ए और बी के इंजेक्शन जरूर लगवाएं। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई न ले। फैटी लीवर से बचने के लिए अल्कोहल और धूम्रपान का सेवन ना करें।
खानपान का रखें ध्यान :— आहार में फाइबर युक्त चीजें ले जैसे– हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, चोकर युक्त आटा, दलिया, वोट, सलाद में गाजर, टमाटर, प्याज आदि ज्यादा से ज्यादा ले।अंगूर, ब्लूबेरी, सेब, नींबू, संतरा, कीनू, पपीता, एवोकैडो, आंवला ताजे फल ले
इन चीजों से बचें :— अत्यधिक गरिष्ठ, अधिक तला-भुना और मांसाहारी भोजन से परहेज करें।हाई कैलोरी और वसा युक्त फूड, प्रोसे्सड फूड से बचें। नमक और मसाले न्यूनतम खाए।शर्करा युक्त चीजें, मिष्ठान, शीतल पेय आदि कम लें।
लिक्विड डाइट पर जोड़ दें :— दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। ज्यादा से ज्यादा लिक्विड डाइट लें। सुबह खाली पेट वेजिटेबल जूस लेना सही है। सुविधा अनुसार पुदीना के पत्ते, नींबू, अदरक, तुलसी, नारियल पानी, खीरा, करेला, एलोवेरा आदि का डिटॉक्स वाटर ले सकते हैं। दिन में एक बार ग्रीन टी पीना चाहिए।
रेगुलर एक्सरसाइज:— लीवर स्वस्थ रखने के लिए वजन को नियंत्रण रखना जरूरी है। आप सुविधा अनुसार 30-40 मिनट एक्सरसाइज कर सकते हैं। इसमें ब्रिक्स वाक या जॉगिंग, एरोबिक, डांस आदि शामिल कर सकते हैं।
व्यक्तिगत स्वच्छता बरतें:— भोजन से पहले शौचादि के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं।हेपेटाइटिस से बचाव के लिए असुरक्षित यौन संबंध न बनाएं। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के समय सुनिश्चित करें कि रक्त संक्रमित ना हो। लीवर संबंधी किसी भी परेशानी में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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